फुल पेमेंट एग्रीमेंट पर खूब होती है संपत्ति की खरीद-फरोख्त.
प्रॉपर्टी लेन-देन का यह तरीका बिल्कुल भी सही नहीं है.
संपत्ति की रजिस्ट्री न करवाने से हो सकता है विवाद.
नई दिल्ली. मकान, दुकान, प्लाट या कृषि भूमि की रजिस्ट्री कराने के लिए सरकार को शुल्क देना पड़ता है. भारत में 100 रुपये मूल्य से ज्यादा की किसी भी तरह की संपत्ति का अगर किसी भी प्रकार से हस्तांतरण होता है, तो यह लिखित में होना चाहिए. ऐसा भारतीय रजिस्ट्रेशन एक्ट कहता है. संपत्ति का रजिस्ट्रेशन सब-रजिस्ट्रार कार्यालय, जिसे तहसील भी कहा जाता है, में करवाया जाता है. लेकिन, बहुत से लोग प्रॉपर्टी बेचने वाले से फुल पेमेंट एग्रीमेंट (Full payment Agreement of Property) करके संपत्ति खरीद लेते हैं. आमतौर पर ऐसा रजिस्ट्री शुल्क बचाने के लिए किया जाता है.
रजिस्ट्री न करवाकर फुल पेमेंट एग्रीमेंट पर ही संपत्ति खरीदना कतई फायदे का सौदा नहीं है. यह कहना है पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के वकील सुधीर सहारण का. उनका कहना है कि अपनी गाढ़ी कमाई को प्रॉपर्टी में लगाना है तो स्टॉम्प ड्यूटी बचाने के चक्कर में फुल पेमेंट एग्रीमेंट या वसीयत जैसे तरीकों को अपनाने से बचना चाहिए. ऐसा करने पर कई बार आदमी झंझट में फंस सकता है और प्रॉपर्टी से हाथ भी धो सकता है.
फुल पेमेंट एग्रीमेंट के नुकसान
एडवोकेट सुधीर का कहना है कि फुल पेमेंट एग्रीमेंट सिर्फ दो लोगों के बीच भरोसे और संबंधों पर निर्भर है. पावर ऑफ अटॉर्नी या फुल पेमेंट एग्रीमेंट से आपको किसी भी प्रॉपर्टी का कानूनन मालिकाना हक नहीं मिल जाता. यह मालिकाना हक का दस्तावेज नहीं है. इससे संपत्ति की म्यूटेशन यानी दाखिल खारिज भी नहीं होता. ऐसे मामले कोर्ट में हमेशा कमजोर होते हैं. संपत्ति आपके हाथ से जाने का जोखिम ज्यादा होता है.
फुल पेमेंट एग्रीमेंट से रजिस्ट्री
एडवोकेट सुधीर सहारण का कहना है कि अब देश में बहुत सी जगह फुल पेमेंट एग्रीमेंट के आधार पर रजिस्ट्री होने लगी है. अगर हरियाणा की बात करें तो फुल पेमेंट एग्रीमेंट के बाद अगर संपत्ति बेचने वाला रजिस्ट्री कराने से मुकर जाए तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जा सकता है और एग्रीमेंट को पूरा कराया जा सकता है. लेकिन, ऐसा करने के लिए कुछ शर्तों को पूरा करना होता है.
फुल पेमेंट एग्रीमेंट निर्धारित स्टॉम्प पेपर पर होना चाहिए. इस पर खरीदार और विक्रेता दोनों के हस्ताक्षर तथा साथ ही गवाहों के साइन भी होने चाहिए. साथ ही संपत्ति की दो लाख रुपये से ज्यादा की पेमेंट चेक या बैंक ट्रांसफर के माध्यम से होनी चाहिए. सहारण का कहना है कि अगर फुल पेमेंट एग्रीमेंट उक्त शर्तों को पूरा करता है तो खरीदार का दावा मजबूत हो जाता है और विक्रेता को रजिस्ट्री कराने को कोर्ट के माध्यम से मजबूर किया जा सकता है.